'तुका झाला पांडुरंग' : सुरमयी अभंग प्रस्तुति ने श्रोताओं को किया भावविभोर
Published on 7 August 2026
नागपुर, 7 अगस्त।
आद्यब्रह्मवादिनी फाउंडेशन की ओर से आयोजित 'तुका झाला पांडुरंग' सुरमयी अभंग प्रस्तुति को नागपुर के संगीत प्रेमियों और श्रद्धालुओं का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला। साइंटिफिक सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में संतश्रेष्ठ संत तुकाराम महाराज के चुनिंदा अभंगों की मधुर प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
प्रख्यात गायिका डॉ. साधना शिलेदार और डॉ. राहुल एकबोटे ने अपनी भावपूर्ण और मधुर गायकी से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वारकरी परंपरा के भजन, संत तुकाराम महाराज के अभंगों में निहित आध्यात्मिक संदेश तथा वाद्य कलाकारों की उत्कृष्ट संगत ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की।
श्रोताओं के विशेष आग्रह पर डॉ. राहुल एकबोटे ने 'कानडा राजा पंढरीचा' अभंग प्रस्तुत किया, जिसे भरपूर सराहना मिली। वहीं, डॉ. साधना शिलेदार ने राग भैरवी में 'आपुल्या माहेरा जाईन मी आता' अभंग की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में कुल 15 अभंगों की प्रस्तुति हुई।
इस सांगीतिक आयोजन की संकल्पना आद्यब्रह्मवादिनी फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वृषाली शिलेदार की थी। कार्यक्रम का संयोजन मानसी देशपांडे और डॉ. वंदना कुलकर्णी ने किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में आद्यब्रह्मवादिनी की मुख्य संचालिका आरती महाजन और जयश्री धर्माधिकारी ने कलाकारों का स्वागत किया। प्रस्तावना में अंजली देशपांडे ने वर्ष 2023 से 2026 तक फाउंडेशन की तीन वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए महिलाओं के संगठन, सशक्तिकरण और विभिन्न क्षेत्रों में उन्हें मंच उपलब्ध कराने के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था के विभिन्न उपक्रमों से अब तक राज्यभर की लगभग 30 हजार महिलाएं जुड़ चुकी हैं।
अभंग प्रस्तुति के दौरान स्नेहा शिनखेडे ने संत तुकाराम महाराज के अभंगों के आध्यात्मिक संदेश को प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया। संगीत संगत में संवादिनी पर श्रीकांत पिसे, तबले पर निखिल मडावी, पखावज पर आशीष गायधन, तथा सह-तालवाद्य पर गजानन रानडे और सोहम रानडे ने उत्कृष्ट साथ निभाई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वंदना कुलकर्णी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन मानसी देशपांडे ने किया। आयोजन की सफलता में शिवानी दिवाळे, हेमांगी जोशी, शिल्पा नाईक, कविता मोहरील, प्राची कुलकर्णी, डॉ. ज्योति शिवलकर और सुनीती मोहरील का विशेष सहयोग रहा।
सभी के लिए निःशुल्क आयोजित इस कार्यक्रम में अभंग संगीत प्रेमी, वारकरी परंपरा के अध्ययनकर्ता, सांस्कृतिक क्षेत्र के गणमान्य नागरिक तथा आद्यब्रह्मवादिनी फाउंडेशन के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। भक्ति, संगीत और संत साहित्य के सुंदर संगम से सजा यह आयोजन उपस्थित श्रोताओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।